कुछ सालों के अंदर सोशल मीडिया के चलन में बहुत बढ़त हुई है। गूगल, फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम ने सारी दुनियाँ से स्त्री-पुरुष, बेरोजगार-रोजगार हर तपके और उम्र के लोगों को अपनी ओर खींचा है। सब अपने-अपने तरीके और स्तर से इस क्षेत्र में अपनी आजमाईश कर रहे हैं। तकनीक जगत में लगातार बनते नित नए रास्ते इस क्षेत्र की सीमाओं को और भी बढ़ाए जा रहे हैं।

यह उल्लेखनीय है कि सिक्ख इतिहास के मूल स्रोतों में यही बताया गया है कि श्री हरिमन्दिर की नींव स्वयं श्रीगुरु अर्जुनदेव ने अपने कर-कमलों से रक्खी थी। बहुत बाद में यह बात उड़ा दी गई कि यह नींव श्री पंचम गुरु जी ने नहीं बल्कि मुसलमान पीर-फ़क़ीर या दरवेश शेख मुहम्मद मियां मीर ने रक्खी थी। वस्तुत: इस उत्तरवर्ती उड़ाई बात में कोई सार नहीं है। यहां यह विचारणीय है कि मियां मीर द्वारा श्री हरिमन्दिर की नींव रखने की इस निराधार और झूठी बात को किसने पहले-पहल तूल देकर उड़ाया।

हरियाणा राज्य के घर-घर में 5 तारीख़ को शिक्षक दिवस के दिन शाम को 5 बजे 5 मिनट के लिए ताली, थाली या घंटी बजी. राज्य का हर बेरोज़गार युवा और उनके समर्थन में लोग छतों पर दिखे. क्या सरकारी भर्तियों के लिए अब इस मुहीम में सारा भारत एक साथ उतरेगा और उसी भाषा में अपनी बात सरकार तक पहुंचाएगा जिस भाषा में सरकार समझती है l

हमारे हिंदुस्तान में अब बहुत कुछ पहले जैसा नहीं होगा। बहुत कुछ बदल गया है। एकदम उलट हालात में चला गया है। फिर भी आपको, अगर लग रहा हो कि फिर से वही पुरानेवाले दिन आ जाएंगे। सब कुछ पहले जैसा होगा। जीना आसान होगा और हालात सुधरेंगे। तो भूल जाइए। कम से कम 5 साल तक तो यह सब दिमाग से बिल्कुल ही निकाल दीजिए कि जिंदगी फिर से ठीक ठाक हो जाएगी।

आज देश का सबसे पुराना राष्ट्रीय राजनैतिक दल कांग्रेस एक परिवार की भक्ति के दुष्परिणाम से आहत हो रहा हैं। लेकिन भूल सुधार करते हुए पिछ्ले दिनों कुछ प्रथम पंक्ति के कांग्रेस के नेताओं के साथ ही कुछ अन्य वरिष्ठ कांग्रेस जनों ने एक पत्र लिख कर कांग्रेस हाई कमान को सच्चाई का सामना करने के लिये झकझोर दिया है। लगभग सभी समाचार पत्रों में वरिष्ठ पत्रकारों के बडे-बडे लेख आने से अधिनायकवादी सोनिया परिवार संकट में आ गया हैं। इस वर्ण संकर परिवार का वर्षो पुराना अहंकार सम्भवत: अब टूटने जा रहा हैं।

पार्टी के आग्रह को मानते हुए सोनिया जी ने अगले छह माह तक कांग्रेस की कार्यवाहक अध्यक्ष बने रहना स्वीकार कर लिया है | अब प्रश्न यह है कि छह माह में कांग्रेस क्या कोई नया अध्यक्ष ढूँढ पाएगी ? कांग्रेस पार्टी का इतिहास बताता है कि वहाँ पिछले सौ वर्षों से गाँधी-नेहरू परिवार के सदस्य या उनके प्रतिनिधि स्थाई अध्यक्ष के रूप में स्वीकार किये जाते रहे हैं | यद्यपि परिवार की सहमति के बिना भी कुछ प्रभावशाली लोग अध्यक्ष बने, किन्तु वे अधिक समय तक टिक नहीं पाए | पार्टी संगठन के भीतर भी परिवार का अपना संगठन है जो सभी को नियंत्रित करता है | गाँधी परिवार पर मुखर होने वाले के लिए पार्टी में बाहर जाने का मार्ग खोल दिया जाता है |

कहा जाता है कि पुष्यमित्र शुंग के काल में ब्राह्मण और दलित जैसा विभाजन था, जबकि यह विभाजन मुसलमानों और अंग्रेजों की देन है। उन्होंने अपने समय में जो हमारी पुस्तकों से खिलवाड़ किया और हमारे समाज की वर्ण व्यवस्था को समझ नहीं सके। मुसलमानों को शेख सैयद, मुगल व पठान जैसे विशेषणों वाली जाती व्यवस्था की आदत थी और अंग्रेजों में स्टूअर्ट, बार्बू, हेनरी और हॉनऑवर जैसी उच्च जाति व्यवस्था की।

हजारों वर्ष पूर्व भगवान राम ने 'बहुविवाह' और 'जनसंख्या विस्फोट' पर रोक लगाया था और एक 'समान नागरिक संहिता' और ‘हम दो-हमारे दो’ नीति लागू की थी. जनता को स्पष्ट संदेश देने के लिए भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघन ने स्वयं ‘हम दो-हमारे दो’ नियम का पालन किया था जबकि उस समय जनसँख्या विस्फोट की समस्या इतनी खतरनाक नहीं थी. वर्तमान समय में जनसँख्या विस्फोट भारत के लिए बम विस्फोट से भी अधिक खतरनाक है. जब तक 2 करोड़ बेघरों को घर दिया जायेगा तब तक 10 करोड़ बेघर और पैदा हो जायेंगे इसलिए जनसंख्या विस्फोट रोकना बहुत जरूरी है.

विद्याधर वाव वडोदरा शहर के बाहरी हिस्से में गोत्री के पास सेवासी गांव में स्थित एक विशाल जल स्थापत्य के रूप में है। यह वाव वडोदरा शहर में ही है, फिर भी वडोदरा के लोग ही इससे अनजान हैं। गुजरात के अन्य लोगो की तो बात ही कहाँ करे? करीब 475 साल पुरानी यह वाव अभी उसके अस्तित्व का जंग समय के साथ लड़ रही है।

स्वामी विवेकानन्द ने हिन्दू की पहचान ही बताई थी: ‘सत्य का निष्कपट पुजारी’। यह महज सौ साल पहले की बात है। विवेकानन्द मात्र सैद्धांतिक नहीं, वरन व्यावहारिक स्थिति भी बता रहे थे। जिसके वे स्वयं प्रमाण थे। उन्होंने सारी दुनिया को किसी कपट या लफ्फाजी से नहीं, बल्कि शुद्ध सत्य से जीता था। तब क्या हो गया कि यहाँ हिन्दुओं में दिनों-दिन मिथ्याचार का सहारा लेने की आदत बढ़ती जा रही है?