दलित कैथोलिक चर्च का विचार दलित ईसाइयाें के साथ किसी विश्वासघात से कम नहीं है, उस से धर्मान्तरित ईसाइयाें काे क्या लाभ ? अलग चर्च बनाने से होगा क्या ? अलग चर्च बनाने का विचार पराेसने वाले क्या आश्वस्त हैं कि वेटिकन भारतीय कैथाेलिक चर्च के संसाधनों का उनसे बँटवारा करने के लिए सहमत हाेगा ? अगर दलित ईसाइयों को कैथोलिक चर्च से अपने हिस्से के संसाधन न मिले, ताे नया चर्च क्या कर लेगा। अपनी संख्या बल बढ़ाने के खेल के अलावा फिर बचता ही, क्या है।

मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है क्योंकि सार्वजनिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के एक साधन के रूप में तथा देश के लोकतान्त्रिक चरित्र का प्रचार-प्रसार करने में मीडिया की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है. यह एक तथ्य है कि मीडिया समाज के सभी सदस्यों को सूचना देता है, जागरूक बनाता है और लोकतान्त्रिक मूल्यों का विस्तार करता है या कहे कि नागरिकों को सशक्त बनाता है.

वीर सावरकर जी कहा करते थे कि धर्मांतरण से मर्मान्तरण और मर्मांतरण से राष्ट्रांतरण होता है। इसलिए धर्मांतरण अपने आपमें एक बहुत बड़ी बीमारी है ।धर्म परिवर्तन व्यक्ति के मर्म का परिवर्तन कर देता है और वही व्यक्ति समय आने पर राष्ट्रद्रोही होकर राष्ट्र के विभाजन की मांग करने लगता है ।

केंद्र की मोदी सरकार ने अपनी नई शिक्षा नीति लागू कर दी है । इस शिक्षा नीति पर अनेकों शिक्षाशास्त्रियों, समाजशास्त्रियों, विद्वानों और मनीषियों ने अपने-अपने ढंग से लिखा है । अनेकों विद्वानों ने इसके समर्थन में लिखा है तो कुछ ने इसकी आलोचना की है ।वास्तव में किसी भी देश की शिक्षा नीति उसके भविष्य का दर्पण होती है ।

हाल ही में कृषि सुधारों पर बिल किसानों का उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, 2020; मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा विधेयक, 2020 और किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता ,आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020 विधेयकों को संसद में 14 सितंबर को लॉकडाउन के दौरान जारी अध्यादेशों को बदलने के लिए पेश किया गया।

विश्व में भारत की पहचान एक सबसे बड़े पूर्णतः लोकतांत्रिक व्यवस्था को मानने वाले देश के रूप में होती है, जहां पर आम लोगों के द्वारा चुनी गयी सरकार लोकतंत्र के मूल्यों की रक्षा करते हुए जनहित के सभी कार्यों को समय रहते संपन्न कराती रहती है। हमारा प्यारा देश भारत सम्पूर्ण विश्व में अपनी विविधता पूर्ण बेहद गौरवशाली समृद्धशाली संस्कृति के लिए पहचाना जाता है।

वर्तमान समय में कोरोना संक्रमण ने पूरी दुनिया में कहर बरपाया हुआ है। करोड़ों लोग इससे संक्रमित हुए हैं और लाखों की जान जा चुकी है। कोरोना विषाणु ने विश्व के साथ-साथ भारत देश की भी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया है। इसी के साथ बच्चों के दैनंदिन जीवन और शिक्षण को प्रभावित करते हुए उनके भविष्य को चुनौतीपूर्ण बना डाला है।

भारत और विशेषकर जम्मू कश्मीर के इतिहास में ललितादित्य का नाम उनकी शानदार विजय-यात्राओं के कारण प्रसिद्ध रहा है। कुछ लोग मार्तंड मंदिर के कारण भी उन्हें स्मरण करते हैं। लेकिन विकासमान भारत के संदर्भ में अगर वे किसी बात के लिए प्रासंगिक हैं तो उनकी विदेश नीति और अपनी समरनैतिक सूझबूझ के कारण ही हैं।

कितने लोगों को पता है कि राष्ट्रीय प्रतीकों की ही भांति देश की सरकार ने अपना एक कैलेंडर भी मान्य किया है, जोकि अपने देश की प्राचीन पंचांग परंपरा पर आधारित है। पंडित नेहरू द्वारा प्रसिद्ध विज्ञानी मेघनाद साहा के नेतृत्व में बनाई गई कैलेंडर समिति ने अंग्रेजी कैलेंडर के स्थान पर भारत के परंपरागत पंचाग व्यवस्था पर आधारित सौर शक संवत् को अपनाने का सुझाव दिया था।

इन दिनों देश के खुफिया, रणनीतिक और सामरिक हलकों में एक तूफान-सा आया हुआ है। इस तूफान की वजह है एक बहुसंस्करण अंगरेजी अखबार द्वारा हाल ही में किया गया खुलासा। वह यह है कि चीन एक कंपनी के माध्यम से एक विशालकाय डाटाबेस के जरिये कई देशों के महत्वपूर्ण से लेकर आम लोगों तक की गतिविधियों पर न सिर्फ नजर रखे हुए है, बल्कि विस्तृत जानकारी भी जुटा रहा है।