असम सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि अगले माह यानी नवंबर में वो राज्य में राज्य संचालित सभी मदरसों और संस्कृत टोल्स या संस्कृत केंद्रों को बंद करने संबंधी एक अधिसूचना लाने जा रही है।इस फैसले के अंतर्गत असम सरकार द्वारा संचालित या फिर यूँ कहा जाए, सरकार द्वारा फंडेड मदरसों और टोल्स को अगले पाँच महीनों के भीतर नियमित स्कूलों के रूप में पुनर्गठित किया जाएगा।

सोनिया गांधी ने पिछले दिनों एक राष्ट्रीय समाचार पत्र मे एक लेख लिखा है। इस लेख मे वैसे तो कई कई विडंबनापूर्ण बाते हैं किंतु मैं मुख्यतः दो विषयों पर केंद्रित कर पाया हूं। एक देश मे लोकतंत्र की हत्या व दूजा विषय है देश की समूची मातृशक्ति की अस्मिता, कार्यक्षमता व आगे बढ़ने को शाहीन बाग जैसे बदनुमा दाग से जोड़ना।

हिन्दू धर्म को समझने के लिए उसके प्राचीनतम और आधारभूत धर्मग्रन्थ अर्थात् ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद परम प्रमाण माने गए हैं। इन चारों वेदों में उद्धृत पवित्र मन्त्र वास्तव में ईश्वर की वाणी है, जिनके प्रति सभी हिन्दु धर्माबलंबियों की अगाध श्रद्धा और आस्था जुड़ी हुई है। सृष्टि के अनेक रहस्यों को उद्घाटित करता ऋग्वेद चारों वेदों में सबसे प्राचीन है, जिसमें मण्डल, सूक्त और ऋचाएं वर्णित हैं।

शीर्षक आपको चौंका सकता है या कुछ देर के लिए सोचने के विवश कर सकता है लेकिन 11, 44 और 64 मध्यप्रदेश में बदलाव के महत्वपूर्ण वर्ष के रूप में रेखांकित है। 1956 में मध्यप्रदेश का पुर्नगठन होता है और 11 वर्ष बाद 1967 में पहला बदलाव देखने को मिलता है जब संविद शासन की स्थापना होती है। इसके 33 साल बाद यानि मध्यप्रदेश की स्थापना के 44 साल बाद वर्ष 2000 में मध्यप्रदेश का विभाजन होता है और स्वतंत्र राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ प्रदेश का उदय होता है।

प्रत्येक वर्ष 30 अक्टूबर को पूरी दुनिया में विश्व मितव्ययिता दिवस मनाया जाता है। मितव्ययिता दिवस केवल बचत का ही दृष्टिकोण नहीं देता है बल्कि यह नियंत्रित इच्छा, आवश्यकता एवं उपभोग की आवश्यकता व्यक्त करता है। जीवन में सादगी, संयम, अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण, त्याग एवं आडम्बर-दिखावामुक्त जीवन को प्राथमिकता देता है।

पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त शासन प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सूचना का अधिकार कानून यानी आरटीआई एक्ट अस्तित्व में आया। 12 अक्टूबर, 2005 को भारत में लागू हुए इस कानून ने देश के नागरिकों को एक मायने में वास्तविक स्वतंत्रता दी। लेकिन आज 15 साल बाद भी इसके रास्ते में कई बाधाएं खड़ी हैं। जरूरत आरटीआई कानून को मजबूत करने की है।

कोरोना वायरस महामारी के चलते आर्थिक गतिविधियां पूरे विश्व में ठप्प पड़ गईं थीं। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा एवं मार्च 2020 के बाद से देश में आर्थिक गतिविधियों में लगातार कमी दृष्टिगोचर हुई। जिसके चलते, कई देशवासियों के रोज़गार पर विपरीत असर पड़ा था एवं शहरों से भारी मात्रा में मज़दूरों का ग्रामों की ओर पलायन दिखाई दिया था।

पेरिस में 16 अक्टूबर को एक शिक्षक की नृशस हत्या करके एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार करके भड़के हुए इस्लामिक आतंकवाद ने सभ्य समाज को भयभीत करने का दुःसाहस किया है। विस्तार से समझने के लिए प्राचीन इतिहास को छोड़ते हुए 21 वीं सदी के आरम्भ से अब तक की कुछ घटनाओं पर विचार करना उचित रहेगा।

वाह रे सियासत तेरे रूप हजार। सत्ता की चाहत में राजनेता क्या-क्या नहीं कर गुजरते। सत्ता की चाहत और कुर्सी की लालच में राजनेता सबकुछ कर गुजरने को तैयार रहते हैं। इसका एक ताजा रूप कश्मीर की सियासत में फिर से एक बार देखने को मिला। जम्मू-कश्मीर में धारा 370 की वापसी और तिरंगे को लेकर राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बयानबाजी ने राज्य ही नहीं देश का सियासी पारा चढ़ा दिया है.

अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव बहुत दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुका है। तीन नवम्बर को अमेरिका की आम जनता नए राष्ट्रपति का चुनाव करने के लिए मतदान करेंगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रतिद्वंद्वी जो बाइडेन के बीच सीधा मुकाबला है। इन चुनावों में भारतीय मूल के अमेरीका प्रवासी लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, बावजूद इसके डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत की जिस तरह आलोचना की है, वह न सिर्फ दुखद, विरोधाभासी बल्कि शुद्ध रूप से राजनीति प्रेरित है।