हाईवे निर्माण पर केंद्र सरकार का विशेष ध्यान...

केंद्र सरकार ने इस वर्ष हाईवे निर्माण का लक्ष्य दोगुना करने का फैसला कर लिया है. कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस वर्ष कुल 15000 किमी के हाईवे निर्माण किए जाएँगे

, जबकि पिछले वर्ष यह सीमा दस हजार किमी रखी गई थी और इसमें से 8000 किमी हाईवे का निर्माण पूरा कर लिया गया, केवल 2000 किमी बाकी रह गई थी. आधिकारिक घोषणा के मुताबिक़ अप्रैल-दिसंबर 2016 के बीच 6000 किमी की सड़क निर्मित हुई, अर्थात लगभग बीस किमी सड़क निर्माण प्रतिदिन.

2017-18 के बजट में हाईवे निर्माण के लिए अलग से और अधिक 12,000 करोड़ का प्रावधान किया जा चुका है, जो कि 52446 करोड़ के अतिरिक्त है. अधिकारियों का कहना है कि हालाँकि इस वर्ष का लक्ष्य काफी मुश्किल है, परन्तु चूंकि सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय का निर्देश है और नितिन गड़करी के दिशानिर्देशों के तहत काम होने वाला है तो संभवतः 15000 किमी में से 12000 किमी का लक्ष्य तो प्राप्त कर ही लिया जाएगा, हालाँकि बहुत कुछ मानसून पर भे निर्भर करता है क्योंकि उस दौरान सड़क निर्माण कार्य धीमा हो जाता है. हाईवे निर्माण हेतु अगले वर्ष का कुल बजट 69,000 करोड़ को भी पार करने की संभावना है. देश के नेशनल हाईवे के अलावा उत्तर-पूर्वी राज्यों के पहाडी क्षेत्रों में विशेष सड़क निर्माण के लिए भी 7300 करोड़ रूपए का अलग से प्रावधान किया जा चुका है. केंद्र सरकार की एक और महत्त्वाकांक्षी योजना सभी समुद्र तटीय इलाकों को सड़कों से आपस में सीधा जोड़ने की है. महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, केरल और उड़ीसा की राज्य सरकारों को 2000 किमी की समुद्र तटीय सड़कें बनाने के लिए अलग से फंड दिया जाएगा.

कुल मिलाकर बात यह है कि सड़कें देश के विकास का इंजन होती हैं, और गुजरात की तरह नरेंद्र मोदी और नितिन गड़करी का विशेष ध्यान इस दिशा में बना हुआ है.

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