ईसाई धर्मांतरण की बड़ी संस्थाओं पर ताले लगना शुरू

भारत में पिछले कई वर्षों से अस्पताल और कॉन्वेंट स्कूलों की आड़ में ईसाई धर्मांतरण का खेल चल रहा है. विदेशों से भारी मात्रा में डोनेशन पाकर कई संस्थाएँ विशालकाय बन गई थीं. इन्हीं में से एक संस्था है “कम्पैशन” , जो 540 चर्चों के सहारे अनाथ बच्चों को बचाने और उन्हें शिक्षा दिलवाने के नाम पर उनका अपहरण करके विदेश ले जाने, उन्हें वहां महंगे दामों में बेचने तथा बचे हुए बच्चों का धर्मांतरण करवाने के काम में 1952 से लगी हुई थी.  

कम्पैशन नामक यह संस्था “वर्ल्ड विजन” अथवा ग्रीनपीस” जितनी बड़ी तो नहीं है, लेकिन फिर भी इसे करोड़ों डॉलर की विदेशी मदद लगातार पिछले बीस वर्ष से मिल रही थी. मोदी सरकार ने आते ही NGOs की आड़ में चल रही ऐसी संस्थाओं से हिसाब-किताब माँगना शुरू किया, जो कि ये दे नहीं पाए. विदेशी डॉलर के खर्चे कहाँ किए, कैसे किए, कौन-कौन से NGOs साथ में कार्य कर रहे हैं, अनाथ बच्चों की पूरी लिस्ट और उनका रिकॉर्ड माँगा गया... ज़ाहिर है कि पिछली सरकारों की छत्रछाया में पलने के आदी हो चुकी इन संस्थाओं को दर्द तो होना ही था. इसीलिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन्होने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार इन्हें “समाजसेवा”(??) नहीं करने दे रही है और इनकी राह में रोड़े अटका रही है. असल में मोदी सर्कार ने FCRA (विदेशी मुद्रा अधिनियम) को कठोर बना दिया है, इसलिए इन संस्थाओं की फंडिंग बंद होने की नौबत आ गई है.

“कम्पैशन” के मुखिया सैंटियागो जिमी ने कहा कि यदि ऐसी ही स्थिति बनी रही तो हमें भारत के अपने सभी दफ्तर बंद करने पड़ेंगे और डेढ़ लाख बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा. दिसंबर 2016 तक इस संस्था के 63 विदेशी दानदाताओं ने विदेशों से चन्दा भेजना बंद कर दिया है, क्योंकि विदेश मंत्रालय के जरिये सम्बंधित सरकारों से अनुरोध करके उनसे भी हिसाब माँगा गया है. “कम्पैशन” के पांच लाख कर्मचारी एक याचिका बनाकर डोनाल्ड ट्रंप के सामने गुहार लगाने वाले हैं कि नरेंद्र मोदी सरकार को इस प्रकार की कार्यवाही से बचाने के लिए बात करें.

संस्था के प्रवक्ता एरिक मेताक्सस ने कहा कि मोदी सरकार अपने “हिन्दू एजेंडा” पर काम कर रही है और पिछले दो वर्ष में ही बारह राज्य सरकारों ने धर्मांतरण कानूनों को और भी कठोर बना दिया है. भारत के नागरिकों में यह चेतना जागृत हो रही है कि यदि सेवा कार्यों के साथ कोई ईसाई सन्देश दिया जाए तो उसे संदिग्ध दृष्टि से देखा जाए. एरिक ने आगे कहा कि भाजपा की सरकार “केवल समाजसेवा” को ही बढ़ावा देती है, यदि इन संस्थाओं में धर्म प्रचारक जुड़ते हैं तो वे इसे रोकने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहती है.  

स्रोत... christianpost.com

Tags: desiCNN, Compassion International, Conversions in India, Church and Conversion in India

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