उस दिन ओसामा बिन लादेन के तिक्का-बोटी दिवस की बरसी थी। टी वी के इक्का-दुक्का चैनलों पर घूँघट काढ़े एक समाचार फ़्लैश हुआ कि कांधला के निकट एक ट्रेन में तब्लीगी जमात के कुछ लोगों के साथ मार-पीट हुई और अगले दिन बीकानेर से हरिद्वार जाने वाली ट्रेन रोक कर उस पर पत्थर बरसाए गए।

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भारत में 200 वर्ष पहले आँखों की सर्जरी होती थी...शीर्षक देखकर आप निश्चित ही चौंके होंगे ना!!! बिलकुल, अक्सर यही होता है जब हम भारत के किसी प्राचीन ज्ञान अथवा इतिहास के किसी विद्वान के बारे में बताते हैं तो सहसा विश्वास ही नहीं होता. क्योंकि भारतीय संस्कृति और इतिहास की तरफ देखने का हमारा दृष्टिकोण ऐसा बना दिया गया है

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इडाहो एयर नेशनल गार्ड का पायलट बिल मिलर 10 अगस्त 1990 को अपनी नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था. अचानक उसने ओरेगॉन प्रांत की एक सूखी हुई झील की रेत पर कोई विचित्र आकृति देखी. यह आकृति लगभग चौथाई मील लंबी-चौड़ी और सतह में लगभग तीन इंच गहरे धंसी हुई थी. बिल मिलर चौंका, क्योंकि लगभग तीस मिनट पहले ही उसने इस मार्ग से उड़ान भरी थी तब उसे ऐसी कोई आकृति नहीं दिखाई दी थी.

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दोस्तों........अपने लेख कई बार मैं एक कहानी सुना के शुरू करता हूँ जो ज़्यादातर काल्पनिक होती है ....आज फिर एक कहानी सुना रहा हूँ ,,,,,पर ये काल्पनिक नहीं है. यह एक सच्ची घटना है .........काफी पुरानी बात है ...एक लड़की थी ........बचपन में एकदम सामान्य ........सामान्य से घर में जन्मी थी .अक्सर बीमार रहती थी ....

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मित्रों भारत में आजकल “रेप” का फैशन चल रहा है. अखबार-चैनल-सोशल मीडिया सभी पर रेप छाया हुआ है. जिस दिन रेप की खबर नहीं होती, लगता है कि दिन सूना हो गया. इसलिए जब “प्रगतिशील” महिलाएँ बोर होने लगती हैं तब सात-आठ साल से लिव-इन में रखैल की तरह खुशी-खुशी रहने के बाद अचानक उन्हें याद आता है कि, “अरे!! ये तो रेप हो गया”.

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#Adarsh_Liberal इस हैशटैग के साथ अंग्रेजी भाषा में लगातार "आदर्श लिबरल" की जमकर बखिया उधेड़ी जा रही है. बजाने का यह काम हिन्दी में हम पहले से ही "छद्म प्रगतिशील" (छद्म सेकुलर) कहकर करते आ रहे हैं. फिर भी संक्षेप में थोड़ा और परिचय दे दूँ.

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जब एक आधे-अधूरे मंदिर, फटे हुए टेंट में बैठे हुए रामलला, सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों की बंदूकों के बावजूद तीन सौ करोड़ रूपए कमा लिए तो जब एक भव्य-विशाल-सुन्दर राम मंदिर बनेगा तो यूपी सरकार के खजाने में कितने हजार करोड़ रूपए प्रतिवर्ष आएँगे??

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विक्रमीय संवत्‍सर की बधाइयां देते-लेते पूरा दिन हो गया...। भारत कालगणनाओं की दृष्टि से बहुत आगे रहा है। यहां गणित को बहुत रुचि के साथ पढ़ा और पढ़ाया जाता था। यहां खास बात पर्व और उत्‍सवों के आयोजन की थी और उसके लिए अवसरों को तय करना बड़ा ही कठिन था।

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जब हम छोटे थे तो घर में चापाकल हुआ करता था, अब ये सिर्फ सरकारी ही देखने मेंआता है | जब घर में एक नया चापाकल लगवाने की बात हुई तो दादाजी सारे पुर्जे ख़रीदने निकले | करीब सात सौ रुपये का चापाकल था, और उसके साथ लगनी थी लम्बी सी पाइप|

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