यह घटना एक परिचित के साथ घटी थी, जब गृह प्रवेश के वक्त मित्रों ने नए घर की ख़ुशी में उपहार भेंट किए थे। उपहारों को खोलना शुरू किया तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं था. एक दो उपहारों को छोड़कर बाकी सभी में लाफिंग बुद्धा, फेंगशुई पिरामिड, चाइनीज़ ड्रेगन, कछुआ, चाइनीस फेंगसुई सिक्के, तीन टांगों वाला मेंढक, और हाथ हिलाती हुई बिल्ली जैसी अटपटी वस्तुएं भी दी गई थी।

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डॉनल्ड ट्रम्प ने 7 मुस्लिम देशों के नागरिकों पर अमरीकी वीज़ा बंद क्या कर दिया कि संसार भर के लोगों के पेट में पानी होने लगा। दस्त लग गये मगर उन्हें बंद करने की दवा नहीं सूझ रही। अमरीका तक में मरोड़ें शुरू हो गयीं।

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पिछले दस वर्ष के लेख गवाह हैं कि पश्चिम बंगाल के बारे में कई राष्ट्रवादी ब्लॉगर्स चेतावनियाँ जारी करते रहे, बंगाल के वामपंथी शासन में बढ़ते इस्लामी मुल्लावाद के खिलाफ जनजागरण करते रहे, सरकारों से अपीलें करते रहे, लेकिन किसी पर कोई असर नहीं हुआ.

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बुधवार, 01 फरवरी 2017 18:16

संघ शाखा की स्मृतियाँ...

करीब दसियों साल पहले, एक मित्र RSS की एक शाखा का परिचय इस तरह करवाकर मुझे वहां ले गया कि "चलो, वहां लाठी चलाना, जूडो- कराटे सिखाते हैं". मैं उसके साथ गया, फिर करीब 5-6 साल सक्रिय स्वयंसेवक रहा, बहुत से लोगों से संपर्क हुआ, बहुत कुछ सीखा जाना, कबड्डी खेली, राष्ट्रवाद समझा,

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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सबसे ज्यादा हल्ला वामपंथी ही करते हैं...और इससे बड़ा विद्रूप और कुछ नहीं हो सकता... स्टालिन के अपने शासन काल में कुल 2.7 करोड़ लोग बिलकुल गायब हो गए...कितनी ही ज़िन्दगियाँ साइबेरिया की गुमनामी में खो गयीं,

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वह 1 फरवरी 1948 का दिन था. गांधी का वध हुए दो ही दिन हुए थे. हवाओं में कुछ बेचैनी और माहौल में कुछ उदासी थी. सुबह स्कूल जाते समय कुछ ब्राह्मण बच्चों ने गलियों के कोने में खड़े कुछ लोगों कानाफूसियाँ सुनी थीं

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संजय भंसाली के समर्थन आये लोग उसके विरोध को पूर्वाग्रह से किया हुआ बता रहे है और उसके समर्थन में दो तरह के तर्क दे रहे है। एक यह की लोगो ने पद्मावती की पठकथा बिना देखे विरोध कर रहे है और दूसरा संजय भंसाली भारत के एक श्रेष्ट निर्देशक है जो बड़ी फिल्म बनाने में सिद्धस्त है, इस लिए उनको पूरी स्वतंत्रता है कि वह अपनी कला की किसी भी तरीके से अभिव्यक्त करे। मैं यह पहले तो एक बात साफ़ कर दूँ की संजय भंसाली का पद्मावती को लेकर फिल्म बनाने का विरोध भारतियों ने किया है न की किसी विचारधारा के अंतर्गत यह हुआ है। यहां लोग यह भूल जाते है की जिस करणी सेना ने भंसाली को झापड़ मारा है वह सेक्युलर कांग्रेस समर्थित है, उसका बीजेपी से कोई मतलब भी नही है इसलिए राजनीति इसमें नही घुसेडनी चाहिए। अब चलिए मुद्दे पर आते है।

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विकलांग करके गवाने की भयावह, घृणित परंपरा ! ये जो विकलांग करवा कर गाना गवाने की परंपरा है, वो ईसाई "रिलिजन" से आई है। आज जैसा आप बच्चों के जन्म, शादी पर, गाने वाले हिजड़ों को देखते हैं, वैसा कुछ होने का जिक्र भी भारतीय ग्रंथों में नहीं आता... पूरा इतिहास यहाँ पढ़िए...

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वामपंथी इतिहासकारों ने इतिहास को लिखा नहीं है, उसे अपनी इच्छानुसार ‘गढ़ा’ है l नालंदा बौद्ध विहारों की क्षति में हिन्दुओं का हाथ दिखा देने के लिए और तुर्क आक्रमणकारियों पर पर्दा डाल देने के लिए क्या क्या फरेब नहीं किये गए... आगे पढ़िए... 

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स्मार्टफोन के बिना भी मोबाईल बैंकिंग संभव...
 
प्रधानमंत्री मोदीजी ने अपनी मन की बात में युवाओं से आग्रह किया है कि हमें कैशलेस सोसायटी की तरफ बढ़ना है और अधिकाँश भुगतान डिजिटल स्वरूप में करना चाहिए, ताकि भारत में नकदी का प्रवाह “सफ़ेद और ईमानदार धन” के रूप में हो सके. स्वाभाविक रूप से मोदी विरोधियों के पेट में दर्द शुरू हुआ और लगभग सभी का मूल सवाल था कि अभी भारत में कितने लोग सरलता से मोबाईल उपयोग कर पाते हैं? भारत में कितने मोबाईल हैं? उसमें से कितने स्मार्टफोन हैं? क्या स्मार्टफोन के बिना भी मोबाईल बैंकिंग संभव है? इन सभी प्रश्नों का एक ही उत्तर है, “जहाँ चाह, वहाँ राह...”.
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