जे एन यू, जाधवपुर मे देश विरोधी नारो के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी मे आज़ादी के नारे लगना और आरोपी उमर खालिद वाले कार्यक्रम के रद्द होने के ड्रामे के बाद, अब दिल्ली विश्वविद्यालय के ही पूर्व प्रोफेसर जी.एन.साईबाबा को गडचिरौली सेशन कोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा सुनाई है|

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प्रिय गुरमेंहर,

नमस्कार...

पिछले कुछ ही दिनों में तुम्हारी वीडियो पोस्ट और कुछ “मीडिया हाउस”(?) द्वारा तुम्हारा इन्टरव्यू लेने के कारण तुम घर-घर में चर्चा का विषय बन गई हो, मैंने देखा कि तुम “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का झंडा बुलंद कर रही हो और तुमने लिखा है कि तुम्हारे पिता को पाकिस्तान ने नहीं मारा, बल्कि “युद्ध” ने मारा”.

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किसी भी समाज में विचार बरसों बरस के लिए कैसे स्थापित होते हैं इसको समझना है तो भारत में वामपंथ को समझिए , आज गंभीर "राष्ट्रवादियों" का एक बहुत बड़ा तबका वामपंथियों को कोसने में अपना समय खर्च करता है , क्यों ? क्या वामपंथी एक दो राज्य छोड़कर कहीं सत्ता में हैं ? क्या उनका कोई व्यापक जनाधार है ? क्या उनका काडर बेस है ? क्या यूवा उनके विचार की तरफ तरफ आकर्षित हैं ? नहीं , सबका जवाब नहीं में ही आएगा , ऐसा कुछ भी नहीं है फिर भी देश के केंद्र में और आधे राज्यों में राज करने वाली विचारधारा के लोग वामपंथ से भयाक्रांत हैं ? क्यों ?

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