सभाओं का शौक बचपन से है, जाते रहता हूँ. हाल ही में एक बार पता चला इंद्रेश कुमार जी मुंबई आनेवाले थे, मैं भी गया सभा में. अब बात उन्होने क्या कहा उसकी नहीं, अलग है. भाषणों के बाद कुछ मुस्लिम प्रश्न पूछने के लिए खड़े हुए. बात यहाँ उनके प्रश्नों की करूंगा, हिंदुओं के लिए उसमें सीख है.

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