शत्रु का शत्रु मित्र होता है इस सिद्धांत से अक्सर "वामी-इलहामी" कंधे से कंधा मिलाकर भारत के राष्ट्रवादीयों को निपटाने में तत्पर दिखाई देते हैं. वामियों को इलहमियों में कोई फासिस्ट प्रवृत्ति नजर नहीं आती, भगवे के अंधे को हरा अच्छा दिखाता होगा शायद.

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"सत्ता बन्दूक की नली से निकलती है..." का घोषवाक्य मानने वाले वामपंथी भारत में अक्सर मानवाधिकार और बराबरी वगैरह के नारे देते हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में इनका तीस वर्ष का शासनकाल गुंडागर्दी, हत्याओं और अपहरण के कारोबार का जीता-जागता सबूत है... वामपंथ का यही जमीनी कैडर अब तृणमूल काँग्रेस में शिफ्ट हो गया है... फिलहाल पढ़िए मनीष कुमार द्वारा वामपंथ पर लिखित एक लेख...

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