इसे भाजपा की मूर्खता कहें, अति-सहिष्णुता या कूटनीति?

Written by बुधवार, 03 मई 2017 12:17

जैसा कि सभी जानते हैं, भारत के मीडियाई क्षेत्र में कई-कई ऐसे पत्रकार और चैनल हैं, जो नरेंद्र मोदी से साफ-साफ़ और खुल्लमखुल्ला नफरत करते हैं. सन 2002 के बाद से भारत के मीडिया ने जिस एक व्यक्ति को सर्वाधिक निशाना बनाया, वे नरेंद्र मोदी ही हैं.

जैसे-जैसे मोदी भाजपा में मजबूत होते गए, गुजरात के चुनाव लगातार जीतते गए... वैसे-वैसे मीडिया मुगलों और वेटिकन से चन्दा खाने वाले “पत्तल-कारों” के एक बड़े समूह (विशेषकर अंग्रेजीदां) ने लगातार बारह वर्षों तक नरेंद्र मोदी के खिलाफ घृणा अभियान चलाया. 2014 के लोकसभा चुनावों में जीत के बाद जब मोदी प्रधानमंत्री बने, तब भी इस हिन्दू विरोधी भावना को मोदी के खिलाफ दुष्प्रचार करते हुए मीडिया द्वारा नित-नए घृणित खेल जारी रखे.

मोदी समर्थकों को बहुत आशा थी कि सत्ता में आते ही सबसे पहले नरेंद्र मोदी मीडिया पर कुछ न कुछ लगाम अवश्य कसेंगे. NDTV जैसे चैनलों की अनियमितताएँ सार्वजनिक मंचों पर उपलब्ध हैं. इनके अलावा कई चैनलों के पत्रकारों की रातोंरात आर्थिक तरक्की तथा कुछ अखबारों द्वारा पत्रकारिता छोड़कर दलाली करने का “नीरा राडिया छाप दुष्कृत्य” सभी के संज्ञान में है. परन्तु मोदी समर्थकों की यह आशा बहुत खोखली साबित हुई, क्योंकि सत्ता में आए हुए लगभग तीन वर्ष हो चुके हैं, मोदी सरकार में जो भी सूचना-प्रसारण मंत्री बना उसने इस घटिया किस्म के मीडिया से “दोस्ताना” सम्बन्ध बनाने का ही प्रयास किया. चैनलों पर रात नौ बजे चलने वाली “मुर्गा-लड़ाई” में भी भाजपा और हिन्दुओं से सम्बंधित मुद्दों को हमेशा लो-प्रोफाईल में अथवा व्यंग्य की तरह दिखाया जाता है.

बहरहाल, लेख का मूल मुद्दा यह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ भी वहां की मीडिया ने अपमानजनक व्यवहार किया था, ट्रंप को पागल, तानाशाह इत्यादि की उपाधि दी... ट्रंप के परिवार के खिलाफ अनर्गल बातें छापीं और डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ तमाम तरह के दुष्प्रचार किए. यानी देखा जाए तो नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप मीडिया की नफरत के मामले में लगभग एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर खड़े दिखाई देते हैं. अब हम देखते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद राष्ट्रपति पद में जीत हासिल करते ही वहां के मीडिया की अक्ल ठिकाने लगाने का काम शुरू कर दिया है. सबसे पहले तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से कई चैनलों का बाकायदा “नाम लेकर” उन्हें अपनी प्रेस कांफ्रेंस में आने से प्रतिबंधित कर दिया, जिसका ट्रंप के वोटर्स ने भारी स्वागत किया. अमेरिका में राष्ट्रपति बनने के बाद पत्रकारों के एक “एलीट समूह” द्वारा एक समारोह और भोज आयोजित किया जाता है, जिसमें नव-निर्वाचित राष्ट्रपति शामिल होते हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने इस परंपरा को भी न सिर्फ तोड़ दिया, बल्कि सार्वजनिक रूप से पत्रकारों के इस समारोह की खिल्ली भी उड़ाई. स्वाभाविक सी बात है कि डोनाल्ड ट्रंप अपने दुश्मन से आमने-सामने का मुकाबला करने के लिए तत्पर हैं. ट्रंप जानते हैं कि कुछ चैनल और कुछ अखबार ऐसे हैं कि कभी सुधर नहीं सकते... वे कुत्ते की पूँछ की तरह हैं और वे सदैव डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ ही रहेंगे, इसलिए उन्हें खुश करने की बजाय उनकी बाँह मरोड़ना ज्यादा उचित है.

trump

जबकि भारत में नरेंद्र मोदी सरकार की तरफ से सहिष्णुता की “उल्टी-गंगा” बह रही है. मोदी सरकार के कार्यकाल में कुख्यात मोदी विरोधी राजदीप सरदेसाई की पुस्तक का विमोचन अरुण जेटली के हाथों होना एक पुरानी बात हो गई... इसी तरह नीरा राडिया की “ख़ास दलाल” बरखा दत्त को विदेश मंत्रालय की विशेष समिति की बैठक में बुलाना भी एक पुरानी बात हो गई... श्रीनिवासन जैन जैसे बेहद पक्षपाती पत्रकार(??) को घर बुला-बुलाकर भाजपा नेताओं द्वारा इंटरव्यू देना भी एक पुरानी बात हो गई... ओम् थानवी जैसे धुर मोदी द्वेषी को राजस्थान की भाजपा सरकार द्वारा सम्मानित करना भी पुरानी बात हो गई... हाल ही एक नई घटना जो हुई है, उसका उल्लेख करना चाहता हूँ. NDTV की ही एक पत्रकार(??) हैं, जिनका नाम है सुनेत्रा चौधरी, ज़ाहिर है कि ये भी हिन्दू विरोधी, संघ-द्वेषी और मोदी से घृणा करने वाली “सेकुलर पत्रकार” हैं... इन्होंने 2009 में एक ट्वीट किया था जिसमें लिखा था कि, “खबर है कि नरेंद्र मोदी को स्वाइन फ़्लू हो गया है... मुझे बेहद खुशी हो रही है...”. कल्पना कीजिए नरेंद्र मोदी के प्रति इनके मन में कितनी घृणा भरी पड़ी है. 2009 के बाद 2014 तक भी लगातार ये मोहतरमा NDTV पर अपना हिन्दू विरोधी ज़हर उगलती रहीं... ये बात और है कि नरेंद्र मोदी का बाल भी बाँका नहीं कर पाईं. तो ऐसी महान पत्रकार महोदया ने एक पुस्तक लिखी है, जिसमें कुछ पीटर मुखर्जी, अमर सिंह, पप्पू यादव और कोबाद गाँधी (नक्सली) जैसे “वीआईपी कैदियों” के बारे में लिखा गया है... इस पुस्तक का विमोचन किया मोदी सरकार में नंबर दो की पोजीशन पर स्थित अरुण जेटली ने. सभी लोग खिलखिलाकर गले मिले... हाथ मिलाए गए... मिठाई खिलाई गई... और सुनेत्रा चौधरी ख्यात लेखिका बन गईं, जिन्हें मोदी सरकार का वरदहस्त प्राप्त है. 

Sunetra 1

भाजपा के कट्टर समर्थकों को आज तक समझ में नहीं आया कि जो दमखम डोनाल्ड ट्रंप ने दिखाई है, वैसी दृढ़ता भाजपा (या संघ का) नेतृत्त्व क्यों नहीं दिखा पाता? क्या इन हिन्दू विरोधी पत्रकारों को सम्मानित करने से क्या इन लोगों के विचार बदल जाएँगे?? जिन लोगों ने अपना पूरा जीवन हिंदुत्व के विरोध में लगाया है, जिन लोगों के मन में गहरे तक संघ-भाजपा के खिलाफ ज़हर भरा पड़ा हो, क्या वे लोग ऐसे सम्मान देने से प्रसन्न होकर मोदी का गुणगान करने लगेंगे?? और यदि मान लीजिए कुछ समय के लिए दिखावटी और “अल-तकैया” छाप मोदी प्रशंसा कर भी दी, तो क्या उससे मोदीजी के ताज में चार रंगीन पंख जुड़ जाएँगे? तो फिर इन सर्पों को दूध क्यों पिलाना? मीडिया के साथ जैसा व्यवहार डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं, क्या वैसा ही भारत की “तथाकथित हिन्दू सरकार” को नहीं करना चाहिए? आखिर कब तक इन संपोलों को पाला-पोसा जाए और इनसे डरा जाए? क्यों न इन्हें इनकी सही औकात दिखाई जाए? इनके प्रति सहिष्णुता और सम्मान दिखाने से नहीं मानेंगे ये... क्या नौ-दस राज्यों में सत्ता और केन्द्र की सारी एजेंसियों की मालिक होने के बावजूद भाजपा में इनके खिलाफ कुछ करने लायक दमखम है?? हालाँकि कुछ “भाजपा अंधभक्त” इस कदम को भी कूटनीति ही बताते हैं... जो नाकामी छिपाने के लिए पसंदीदा शब्द है.

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