FIR के बारे में आप कितना जानते हैं? - महत्त्वपूर्ण जानकारी

Written by शनिवार, 16 दिसम्बर 2017 07:55

भारत जैसे विशाल देश में विधि-व्यवस्था को बनाये रखने हेतु हमारे संविधान ने कानून-व्यवस्था की नींव रखी. देश के वीर जवानों एवं अन्य पैरामिलिट्री फ़ोर्स के उलट, हमारी पुलिस-व्यवस्था का मुख्य कार्य आतंरिक शांति एवं सुरक्षा को बनाये रखना होता है. मगर क्या आपने कभी सोचा है की किसी भी अपराध के छानबीन एवं गुनाहगार तक पहुँचने की यात्रा की शुरुआत आखिर कहाँ से होती है?

जी हाँ आपने सही सोचा, ये शुरू होती है FIR या फिर फर्स्ट इन्फौर्मेशन रिपोर्ट (First Information Report) से. आपके द्वारा किसी भी अपराध के विरुद्ध लिखाई गयी शिकायत ही पुलिस को आप के साथ हुए अपराध के बारे में सूचित करती हैं एवं इसी के द्वारा पुलिस वाले आपकी शिकायत का निबटारा करने हेतु बाध्य होते हैं. मगर कभी-कभी ये भी देखा जाता है, कि आम लोगो के बीच फैली जागरूकता में कमी एवं पुलिसिया कार्यवाही में अरुचि लोगों को पुलिस तक अपनी शिकायतें पहुँचने नहीं देती एवं अमूमन आगे की कार्यवाही हेतु FIR रजिस्टर्ड करने में पुलिस वाले आना-कानी करने लगते हैं. जनता के बीच फैली इन्ही भ्रांतियों को दूर कर लोगो को उनके मौलिक अधिकारों से जुडी FIR एवं FIR सम्बंधित समस्त जानकारियों के बारे में पाठकों का मार्गदर्शन इस लेख में करने की कोशिश की हैं.

आखिर ये FIR होता क्या है? (What is an FIR)

फर्स्ट इन्फौर्मेशन रिपोर्ट (FIR), पुलिस द्वारा लिखित में तैयार की गयी एक रिपोर्ट होती हैं जिसमें पीड़ित पर हुए किसी दंडनीय अपराध का ब्यौरा होता है. ध्यान दे ये FIR रिपोर्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण होती हैं क्योंकि FIR दर्ज होने के बाद पुलिस उस अपराध के छानबीन एवं समाधान के प्रति प्रतिबद्ध हो जाते हैं.


FIR से जुड़े आपके अधिकार  (How to lodge FIR) :-

ध्यान दें कि FIR एक शिकायत होती है, जो किसी व्यक्ति/समूह के मूल अधिकारों के हनन पर उपरोक्त थाने में दर्ज करायी जा सकती हैं. आइये एक नज़र डालते हैं FIR से जुड़े आपके अधिकारों पर... FIR, पीड़ित या फिर पीड़ित के किसी भी जानकार या फिर किसी भी अन्य व्यक्ति द्वारा दर्ज करायी जा सकती हैं एवं पुलिसकर्मी किसी भी रूप में आपके शिकायतों को सुनने एवं उसे दर्ज करने से मना नहीं कर सकते. आप अपनी शिकायत को लिखित या मौखिक में भी दर्ज करा सकते हैं. ध्यान दे मौखिक में दर्ज करायी गयी FIR को आप पुलिसकर्मी द्वारा सुनाने का भी अनुरोध कर सकते हैं. अपने द्वारा दर्ज शिकायतों को पूरी तरह सुनने एवं पढने के बाद ही आप FIR रिपोर्ट में हस्ताक्षर करे. इस कार्य में कोई भी आप पर दबाव नहीं डाल सकता. ध्यान दें कि आपके द्वारा दर्ज की गयी FIRही कानून-व्यवस्था की नींव होती हैं अतः FIR दर्ज करते वक़्त सही एवं सटीक जानकारियां देना अपनी ज़िम्मेदारी समझे.


कब करे Zero FIR का उपयोग:

हत्या, रेप एवं एक्सीडेंट्स जैसे अपराध जगह देखकर नहीं होती या फिर ऐसे केसेस में ये भी हो सकता है कि अपराध किसी उपरोक्त थाने की सीमा में न घटित हो. ऐसे मामलों में तुरंत कार्यवाही की मांग होती है परन्तु बिना FIR के कानून एक कदम भी आगे नहीं चल पाने में असमर्थ होता है. अतः ऐसे मौको में मात्र कुछ चश्मदीद गवाह (Eye-Witness) एवं सम्बंधित जानकारियों के साथ आप इसकी शिकायत नजदीकी पुलिस स्टेशन में करवा सकते हैं. ध्यान रहे लिखित कंप्लेंट करते वक़्त FIR की कॉपी में हस्ताक्षर कर एक कॉपी अपने पास रखना न भूले. ये ज्ञात हो कि FIR दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया को आगे बढाने की सारी ज़िम्मेदारी पुलिसवालो का प्रधान उद्देश्य होती हैं अतः कोई भी पुलिस वाला सिर्फ ये कहकर आपका FIR लिखने से मना नहीं कर सकता कि " ये मामला हमारे सीमा से बाहर का है".


कैसे करें zero FIR:

सामान्य FIR के तरह ही zero FIR भी लिखित या मौखिक में करवाई जा सकती हैं. यदि आप चाहे तो पुलिस वाले से रिपोर्ट को पढने का भी अनुरोध कर सकते हैं. याद रखे कि विषम परिस्थितयों में आपके द्वारा दिखाई गयी सूझ-बूझ एवं जागरूकता ही आपको विषम परिस्थितयों से उबार सकती हैं. अतः हमारी आप सभी से ये ही गुजारिश हैं की सुरक्षित रहे, जागरूक रहे एवं लोगो को भी जागरूक करते रहे. ज्ञात रहे की आपके द्वारा दिखाई जागरूकता एक विकसित समाज की स्थापना करने में हमारी काफी मदद कर सकती हैं.

FIR से सम्बंधित ये भी हैं काम की बातें.

एफआईआर की कॉपी पर उस पुलिस स्टेशन की मुहर और थाना प्रमुख के हस्ताक्षर होने चाहिए। एफआईआर की कॉपी आपको देने के बाद पुलिस अधिकारी अपने रजिस्टर में लिखेगा कि सूचना की कॉपी शिकायतकर्ता को दे दी गई है। आपकी शिकायत पर हुई प्रगति की सूचना संबंधित पुलिस आपको डाक से भेजेगी। आपको और पुलिस को सही घटना स्थल की जानकारी नहीं है, तो भी चिंता की बात नहीं। पुलिस तुरंत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर देगी। हालांकि जांच के दौरान घटना स्थल का थाना क्षेत्र पता लग जाता है, तो संबंधित थाने में केस को ट्रांसफर कर दिया जाएगा। FIR दर्ज करवाने का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। अगर आपसे कोई भी एफआईआर दर्ज करवाने के नाम पर रिश्वत, नकद की मांग करे, तो उसकी शिकायत करें


याद रखिये FIR लिखने का 9K फार्मूला

हम सभी को कभी न कभी FIR लिखाना ही पड़ जाता है, चाहे खुद के लिये या किसी जानने वाले के लिये। अक्सर लोगो की शिकायत होती है कि उनकी FIR थाने में नहीं लिखी गई, या फिर मजिस्ट्रेट के यहाँ FIR के लिये किया गया आवेदन निरस्त हो गया। इसके तो कई कारण होते है किंतु एक कारण ये भी होता है की आपके लिखने तरीका गलत हो। FIR को कम से कम शब्दों में स्पष्ट और पूरे मामले को लिखना चाहिये क्योंकि न्यायालय में आपका केस इसी आधार पर चलता है। आसान भाषा में FIR को लिखने का तरीका बता रहा हूँ क्योंकि कई बार पढ़े लिखे लोग भी FIR लिखने में गलती कर देते हैं.

सबसे पहले आप एक सादा पेपर ले और उसपर 1 से 9 तक नंबर लिख ले, फिर उन सब के सामने K लिख ले, बस हो गया आपका FIR का मसौदा तैयार... 9K का क्या मतलब होता है आप नीचे पढ़ेंगे तो स्वतः स्पष्ट हो जायेगा।

(1) कब (तारीख और समय) - FIR में आप घटना के समय और तारीख की जानकारी लिखे ।

(2) कहाँ (जगह)- घटना कहाँ पर हुई इसकी जानकारी दे।

(3) किसने - अपराध किस ब्यक्ति ने किया (ज्ञात या अज्ञात) एक या अनेक व्यक्ति उसका नाम पता (यदि जानते हों तो) आदि लिखे.

(4) किसको - किस के साथ अपराध किया गया एक पीड़ित है या अनेक... उन सब का नाम व पता।

(5) किसलिये - यह एक मुख्य विषय होता है इसी से यह पता चलता है की कोई कार्य अपराध है या पुरस्कार देने के लायक कार्य है, इसको निम्न प्रकार समझ सकते हैं-

(अ) क एक ब्यक्ति ख पर गोली चला देता है और ख की मृत्यु हो जाती है, क यहाँ पर दोषी होगा।

(ब) क एक ब्यक्ति ख पर अपनी पिस्तौल तान देता है और ख अपने बचाव में क पर गोली चला देता है जिससे क की मृत्यु हो जाती है। ख हत्या का दोषी नहीं है क्योंकि अपनी आत्मरक्षा करते हुए अगर आप किसी की जान भी ले लेते है तो आप दोषी नहीं होंगे ।

(स) क अपनी कार से ख तो टक्कर मार देता है और ख की मृत्यु हो जाती है, क हत्या का दोषी नहीं है बल्कि उस पर दुर्घटना का केस चलेगा और उसके हिसाब से दण्ड मिलेगा।

(द) क एक पुलिस कर्मी है और वह आतंकवादी संगठन के मुठभेड़ में एक या कई आतंकवादीयो को मार देता है। क हत्या का दोषी नहीं होगा बल्कि उसे पुरस्कार दिया जायेगा।

इससे यह स्पष्ट होता है कि कोई भी कार्य तब तक अपराध नहीं है जब तक की दुर्भावना से न किया गया हो।

(6) किसके सामने ( गवाह)- अगर घटना के समय कोई मौजूद हो तो उनकी जानकारी अवश्य देनी चाहिये।

(7) किससे ( हथियार) - अपराध करने के लिए किन हथियार का प्रयोग किया गया ( पिस्तौल , डंडे, रॉड, चैन , हॉकी, ईट। अगर कोई धोखाधड़ी का मामला है तो आप (स्टाम्प पेपर, लेटरहेड, इंटरनेट, मोबाइल, आदि) की जानकारी जरूर प्रदान करे।

(8) किस प्रकार – अपराध करने के लिए कैसा प्रकार अपनाया गया, उसको लिखे।

(9) क्या किया (अपराध) – इन सभी को मिलकर क्या किया गया जो कि अपराध होता है उसको लिखे।

इस प्रकार आप सब आसानी से FIR को लिख सकते है.


अन्य जानकारी

-- FIR आप जहाँ घटना हुई है उसके अलावा भी भारत के किसी भी थाने में जाकर आप FIR लिखा सकते है।

-- FIR न लिखे जाने के कई कारण होते है, मुख्यतः क्राइम रेट अधिक न हो इस कारण नहीं लिखी जाती है (जो कि गैर कानूनी कारण है)। दूसरा कारण अपराध की सत्यता पर शक होता है, जिस कारण पुलिस FIR लिखने से पहले जाँच करना चाहते है। लेकिन

-- FIR लिखवाना आपका अधिकार है (CRPC 154), अगर थाने में आप की FIR नहीं लिखी जाती है तो आप उनके ऊपर के किसी भी अधिकारी (CO, SP, SSP) से FIR लिखने के लिये बोल सकते है, और वे 1 या 2 दिन में जाँच के लिये लेकर संबंधित थाने को FIR लिखने का निर्देश दे सकते हैं. 

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(पोस्ट साभार :- www.crimefreeindiaforce.com

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