भाजपा सांसद का आदिवासी जाति प्रमाणपत्र फर्जी निकला...

Written by शनिवार, 06 मई 2017 08:02

मध्यप्रदेश के बैतूल से सांसद ज्योति धुर्वे का जाति प्रमाणपत्र जाँच के बाद फर्जी पाया गया है. उल्लेखनीय है कि आदिवासियों की बहुलता के कारण बैतूल लोकसभा “अनुसूचित जनजाति” (ST) के लिए आरक्षित है.

इसलिए इस सीट से कोई ST उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकता है, लेकिन ज्योति धुर्वे जो कि SC (अनुसूचित जाति) की हैं, उन्होंने अपने फर्जी जाति प्रमाणपत्र के जरिए चुनाव लड़ा और जीतीं. मध्यप्रदेश सरकार द्वारा उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने गहन छानबीन के बाद पाया कि ज्योति धुर्वे ST नहीं हैं. उनके प्रमाणपत्र फर्जी हैं.

ज्योति धुर्वे के खिलाफ बैतूल कलेक्टर को शंकर पेंद्राम नामक वकील द्वारा मई 2009 में शिकायत की गई थी. यानी यह तय करने में आठ वर्ष लग गए कि ज्योति धुर्वे SC हैं या ST हैं. ज्योति धुर्वे ने खुद को “गोंड” जनजाति का बताया था, लेकिन उन्होंने जांच समिति के सामने जो दस्तावेज प्रस्तुत किए उसमें उन्होंने अपने पति की जाति (अर्थात ST) के दस्तावेज लगाए और अपने पिता (अर्थात जन्म से ST नहीं) के दस्तावेज षड्यंत्रपूर्वक छिपा लिए. जैसा कि नियम है विवाह के पश्चात बदली गई नई जाति मान्य नहीं की जाती, इसलिए जाँच समिति ने उनका जाति प्रमाणपत्र “अब” रद्द कर दिया है.

१) ज्योति धुर्वे का जाति प्रमाण पत्र 1984 में रायपुर के आदिवासी विभाग के संयोजक से बनवाया गया था.

२) इसी प्रमाण पत्र को बैतूल की ग्राम पंचायत चिल्कापुर के सत्यापन के आधार पर तत्कालीन भैसदेही तहसीलदार ने जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिया था.

३) सांसद ने छानबीन समिति के सामने जितने भी साक्ष्य प्रस्तुत किए, उससे उनकी ST जाति की पुष्टि नहीं हो सकी.

आदिवासी कल्याण मंत्रालय ने इस कृत्य पर कड़ी प्रतिक्रिया ज़ाहिर करते हुए ज्योति धुर्वे के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने के लिए कहा है. लेकिन जिस सरकारी मशीनरी ने केवल जाति का पता लगाने में आठ वर्ष निकाल दिए, वह ज्योति धुर्वे के खिलाफ कब और कैसा एक्शन लेगी, इस पर संदेह बना हुआ है. क़ानून यह कहता है की ज्योति धुर्वे को संसद से तुरंत प्रभाव से बर्खास्त किया जाना चाहिए और उनकी सदस्यता समाप्त कर, नए चुनाव होने चाहिए. लेकिन इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने वर्ष तक सांसद रहने के दौरान ज्योति धुर्वे ने जो “कमाई” की और शासकीय सुविधाओं का उपभोग किया, उसकी वसूली कैसे होगी?? क्या भाजपा में इतनी हिम्मत है कि वह अपने सांसद के खिलाफ कोई कठोर कार्यवाही करे? इसी कड़ी में अगला सवाल यह भी उठता है कि आज की तारीख में देश में ऐसे कितने सांसद, कितने विधायक, कितने पार्षद, कितने सरकारी अधिकारी ऐसे घूम रहे हैं और मौज कर रहे हैं... जिन्होंने फर्जी जाति प्रमाणपत्र के जरिये चुनाव जीता या नौकरी हासिल की? मोदी सरकार को एक विशेष फास्ट ट्रैक कमेटी गठित करके, इस बात की गहन जाँच करनी चाहिए कि वास्तव में किस राज्य में अथवा केंद्र सरकार में कितने फर्जी लोग भरे पड़े हैं. सनद रहे कि सांसद ज्योति धुर्वे के खिलाफ उल्टा तिरंगा फहराने का मामला भी लंबित है... 26 जनवरी, 2014 को जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, बैतूल में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में बैतूल-हरदा लोकसभा क्षेत्र की सांसद ज्योति धुर्वे ने राष्ट्रध्वज तिरंगा उल्टा फहरा दिया था. कार्यक्रम में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, बैतूल के अध्यक्ष बसंत माकोड़े एवं प्रभारी महाप्रबंधक श्रीमती लता कृष्णन भी मौजूद थीं. 

OBC वाले SC बनने के लिए आतुर हैं... जबकि SC वाले ST श्रेणी में घुसे जा रहे हैं... यानी नौकरी, पैसा और चुनाव लड़कर सत्ता हासिल करने के लिए ऊपर उठने की बजाय और स्वेच्छा से आरक्षण छोड़ने की बजाय समाज के निचले स्तर तक जाने की भी तैयारी है. आदिवासियों की सीट हड़प कर, दलित नेता अच्छा नहीं कर रहे हैं. लेकिन यदि सत्ता आपके साथ है और प्रशासन में कांग्रेस-भाजपा के नेताओं की आपसी मिलीभगत है, तो किसी भी जाँच को, किसी भी दिशा में भटकाया जा सकता है और उसमें भरपूर देर की जा सकती है... केवल सांसद के रूप में आपकी कमाई का कुछ प्रतिशत, “सही ठिकानों” पर नियमित पहुँचता रहे... अब देखना यह है कि इस मामले में ज्योति धुर्वे पर क्या कार्यवाही होती है.

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