कश्मीर की, कुख्यात धारा 35-A के बारे में आप कितना जानते हैं?

Written by शुक्रवार, 20 अप्रैल 2018 20:17

जम्मू- कश्मीर के लोगो को Article 35A के तहत मिले “Permanent Residents” के दर्जे के साथ उन्हे प्राप्त विशेष अधिकार और सुविधाओं (Jammu Kashmir Special Acts) पर बहस चल रही है. लोग बिना जाने, बिना पढे सिर्फ सुनी सुनाई बातों/ पोस्टों के आधार पर कुछ भी बोल रहे है. आर्टिकल 35A क्या है?, क्यूँ है? और कैसे है? इन सब प्रश्नों के उत्तर अपनी समझ के अनुसार पाठको तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा हूँ. 

किसी भी कानून, प्रथा या नियम को जानने से पहले ये जानना समीचीन होगा कि उसे किन कारणो से बनाया / लाया गया. आर्टिकल 35A के साथ भी एक इतिहास जुड़ा है. ये उस समय की बात है जब जम्मू- कश्मीर पर महाराजा का राज था. उस समय तक जम्मू- कश्मीर में राज्य के बाहर के नागरिक भी व्यवसाय, नौकरी या संपत्ति आदि ले सकते थे. जम्मू- कश्मीर मे कश्मीरी पंडितो द्वारा एक जबर्दस्त आंदोलन चलाया हुआ था जिसका मुख्य नारा था “ कश्मीर, कश्मीरियों का है” “Kashmir for kashmiri”. ये आंदोलन बहुत ज्यादा फैला और इसका प्रभाव इतना गहरा था कि महाराजा जम्मू- कश्मीर को एक Notification State Subject Definition Notification No॰ I –L /84 Dated 20th April,1927 निकालना पड़ा. जिसके अनुसार State Subject को चार क्लास मे बांटा गया.

Class I – इसमे उन लोगो को शामिल किया गया था जो लोग महाराजा गुलाब सिंह के शासन करने से पहले से ही राज्य मे पैदा हुए या रह रहे थे साथ ही ऐसे लोग भी जो संवत 1942 के पहले से राज्य मे permanent रूप से रह रहे थे.

Class II – इसमे वो लोग थे जो Class-I मे नहीं आते थे लेकिन संवत 1968 के खत्म होने तक राज्य मे permanent रूप से रहते थे साथ ही इन लोगो ने अचल संपत्ति अर्जित कर ली थी.

Class –III – इसमे वो लोग शामिल थे जो उपरोक्त Class I और II मे नहीं आते थे, लेकिन इन लोगो ने राज्य मे permanent रूप से रहते थे तथा जिनहोने रैयतनामे के द्वारा अचल संपत्ति प्रपट कि या इजाजतनामे के द्वारा रैयतनामा होने के बाद 10 सालो तक लगातार राज्य मे रहे.

Class IV – इसके अंदर ऐसी companies आती थी जो राज्य मे रैजिस्टर्ड थी, जिनसे राज्य को financial /economic लाभ थे, ये महाराजा बहादुर के विशेष आदेश द्वारा state subject मानी गयी.

Note I – उन मामलो मे जिनका संबंध राज्य द्वारा scholarships, भूमि या मकान, Building, नौकरियों मे भर्ती आदि प्रदान करने से होगा... उन मामलो मे Class I को Class II पर वरीयता प्रदान कि जाएगी, इसी प्रकार class II को class III पर वरीयता प्राप्त होगी.

Note II – इसके अनुसार जो व्यक्ति जिस class के अंतर्गत आयेगा उसकी पीढ़ियाँ भी उसी क्लास के अंतर्गत आएंगी. यानि class I के बच्चे class I मे ही आएंगे जबकि Class II के बच्चे class II मे ही आएंगे.

Note III – जिस क्लास मे पति आता है उसकी पत्नी या विधवा भी उसी क्लास मे आएगी, उसे यह स्थिति तभी तक प्राप्त होगी जब तक कि वो राज्य मे ही रहेगी और Permanent रूप से राज्य के बाहर नहीं रहेगी.

Note IV - For the purpose of the interpretation of the term 'State Subject' either with reference to any law for the time being in force or otherwise, the definition given in this Notification as amended up to date shall be read as if such amended definition existed in this Notification as originally issued -

(इसी क़ानून की विशेष धारा को उजागर करने वाला एक और लेख भी पहले प्रकाशित हो चुका है... उसे भी यहाँ क्लिक करके अवश्य पढ़ें.)

दरअसल ऐसा प्रतीत होता है कि महाराजा जम्मू –कश्मीर चाहते थे कि उनका स्टेट किसी भी देश के साथ न जाकर स्वतंत्र रहे.  इसलिए उन्होने ना तो भारत ना ही पाकिस्तान के साथ जाने की कोशिश की. 1947 को जब पाकिस्तान ने कबीईली लोगो की आड़ मे अपनी फौज भेजकर कश्मीर पर आक्रमण किया तब महाराजा कश्मीर ने 26 October 1947 को भारत सरकार के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिये और रक्षा, विदेश और संचार के अधिकार भारत सरकार को सौंप दिये. कश्मीर के साथ शेष भारत के संबंध अनुच्छेद 370 के तहत maintain किए जाते है. 1952 मे नेहरू और शेख अब्दुल्ला के बीच एक समझौता हुआ जिसे दिल्ली समझौता के नाम से जाना जाता है. इस समझौते की जानकारी लोकसभा मे देते हुए पंडित नेहरू ने लोकसभा को बताया -- “जम्मू- कश्मीर के लोगो की नागरिकता की बात होना स्वाभाविक है, जम्मू –कश्मीर के लोगों को भारत की पूर्ण नागरिकता दे गयी है लेकिन हमारे कश्मीरी दोस्तों को एक या दो मामलो मे शंका या कुशंका है, बहुत समय पहले महाराजा के समय मे एक कानून के द्वारा बाहरी लोगों के कश्मीर मे किसी जमीन जायदाद आदि के खरीदने अधिकार को वंचित कर दिया था, बाहरी लोग कश्मीर मे संपत्ति अर्जित नहीं कर सकते. वर्तमान कश्मीर की सरकार इस कानून के बनाए रखने के लिए आशंकित और उतावली है एवं मुझे (नेहरू को) लगता है कि उनकी आशंका सही भी है. क्योंकि कश्मीर मे बाहरी लोगों का द्वारा कब्जा (Overrun) कर लिया जाएगा, इन लोगो की योग्यता मात्र इतनी होगी कि इनके पास बहुत पैसा होगा और ये लोग खूबसूरत जमीने खरीद लेंगे. ये चाहेंगे कि महाराजा के बनाए कानूनों को शिथिल कर दिया जाए. हम भी चाहते है कि इसे साफ कर देना चाहिए. पुराने कानून के द्वारा State subject यानि कश्मीर के नागरिकों को जो विशेषाधिकार प्राप्त थे जैसे घाटी मे जमीन खरीदना, नौकरियों, scholarship आदि सिर्फ वही के नागरिकों के लिए हो.

अतः हम इस पर सहमत हुए है कि राज्य कि विधायिका को ये अधिकार होगा कि वो इन राज्य के permanent residents के अधिकारो और विशेषाधिकारों कि व्याख्या और इन्हे regulate वर्तमान कानून के तहत करे.खासकर संपत्ति के अर्जन, नौकरियों मे नियुक्ति आदि मामलो मे”. इस समझौते के प्रावधानों को जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा और राष्ट्रपति ने अपनाते हुए एक आदेश निकाला  “The Constitution (Application to jammu and Kashmir) Order1954 जिसके द्वारा भारतीय नागरिकता जम्मू-कश्मीर के लोगो को प्रदान कि गयी, साथ ही साथ संविधान मे 35A को डाला गया जिसके अनुसार भारतीय संविधान जम्मू-कश्मीर कि विधायिका को permanent residents के विशेषाधिकारों की व्याख्या कर सकता है. लेकिन इन सबमे सबसे बड़ा मुद्दा ये है कि “ The Constitution (Application to jammu and Kashmir ) Order1954” ये अनुच्छेद 370 के अंतर्गत राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा नेहरू सरकार कि सलाह पर जारी किया गया. इस प्रकार राज्य सरकार Instrument of Accession और आर्टिकल 370 के संबंध मे व्यापक अधिकार मिल गए ये अधिकार इतने व्यापक है कि प्रतिबंधित सब्जेक्ट जैसे विदेश, रक्षा तथा संचार को छोड़कर राज्य सरकार संविधान के किसी अन्य Decree को मानने से स्वतंत्र है.... जैसे आपने देखा होगा कि जम्मू- कश्मीर मे पहले सर्विस टैक्स नहीं था. 

बहरहाल 35A के संबंध मे महत्वपूर्ण बात ये है कि संविधान संशोधन होते हुए भी इसे कभी भी संसद के द्वारा पास नहीं किया गया बल्कि ये कहना ज्यादा बेहतर होगा कि इसे संसद मे कभी रखा ही नहीं गया. बल्कि इसे राष्ट्रपति कि विधायिकी शक्तियों का उपयोग करते हुए जोड़ा गया. ध्यान देने वाली बात ये है कि संविधान संशोधन के लिए आर्टिकल 368 के अंतर्गत विधेयक को संसद के पटल पर रखना जरूरी है. राष्ट्रपति सिर्फ अनुच्छेद 123 के द्वारा अध्यादेश जारी कर सकता वो भी तब जब संसद का सदन सत्र मे नहीं हो और इसका प्रभाव कुछ समय तक ही होता है जब तक कि इसे संसद अपनी अगली बैठक मे पारित न कर दे. यहाँ ऐसा नहीं हुआ. इसे बिना संसद के राष्ट्रपति द्वारा पास कर दिया गया. हालांकि यहाँ यह बताना भी महत्वपूर्ण होगा कि राष्ट्रपति द्वारा लगभग संघीय सूची के 97 मे से 94 मामलो को जम्मू- कश्मीर के संदर्भ मे राष्ट्रपति के आदेश द्वारा ही पास किया गया. चूंकि आर्टिकल 35A संसद द्वारा पास नहीं किया गया था अतः इसे इसी आधार पर चुनौती दी गयी है जो अभी तक SC मे लंबित है.

इसके अलावा निम्न मुद्दो पर लोग/ दल Objection करते रहे है :-

Permanent Residents Certificate जो आर्टिकल 35A के द्वारा बनाया गया वो आर्टिकल 14 Equality before Law का Violation है

ये क़ानून जम्मू-कश्मीर की महिलाओ को स्वयम की पसंद के व्यक्ति से विवाह करने के अधिकार को कुछ इस प्रकार हनन करता है कि यदि वे अपनी पसंद के बाहरी व्यक्ति से शादी कर ले तो उनके बच्चे PRC नहीं पा सकेंगे उन्हे अपने माँ कि संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं दिया जाएगा. परन्तु फिर भी ऐसे कानूनों के खिलाफ भारत के कथित मानवाधिकार वाले, प्रगतिशील और नारी सम्मान का झण्डा बुलंद करने वाले लोग कभी कुछ नहीं बोलते. 

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