प्रिये प्राणेश्वरी, हृदयेश्वरी - शुद्ध हिन्दी गाना

Written by शुक्रवार, 20 जुलाई 2007 12:24

हिन्दी फ़िल्मों में अक्सर गीतों को लिखते समय या उनके चित्रीकरण के समय कोई जरूरी नहीं है कि उनका आपस में कोई तालमेल हो ही...हिन्दी फ़िल्मी गीतों के इतिहास को देखें तो हिन्दी के शब्दों का अधिकतम प्रयोग करने वाले गीतकार कम ही हुए हैं, जैसे भरत व्यास, प्रदीप आदि । यह लगभग परम्परा का ही रूप ले चुका है कि उर्दू शब्दों का उपयोग तो गीतों में होगा ही (आजकल तो अंग्रेजी के शब्दों के बिना हिन्दी गीत नहीं बन पा रहे गीतकारों से) इसलिये यह गीत कुछ "अलग हट के" बनता है, क्योंकि इस गीत में शुद्ध हिन्दी शब्दों का खूबसूरती का प्रयोग किया गया है, और कई लोगों को जानकर आश्चर्य होगा कि गीत लिखा है वर्मा मलिक साहब ने.

(इन्हीं वर्मा मलिक साहब ने शादियों में बजने वाला कालजयी गीत "आज मेरे यार की शादी है" भी लिखा है, इनका दुर्भाग्य यह रहा कि इन्हें अधिकतर "बी" और "सी" ग्रेड की फ़िल्में ही मिलीं जिन्हें फ़िल्मी भाषा में "सुपरहिट" कहा जाता है, वैसी नहीं), गीत को धुनों में बाँधा है कल्याणजी-आनन्दजी ने, फ़िल्म है "हम तुम और वो" (१९७१) तथा गीत को बडे़ मजे लेकर गाया है किशोर दा ने । फ़िल्म में यह गीत फ़िल्माया गया है विनोद खन्ना और भारती पर (दक्षिण की हीरोइन - कुंवारा बाप, मस्ताना, पूरब-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण आदि हिन्दी फ़िल्मों में ये दिखाई दी हैं) । मुझे हमेशा लगता है कि यह गीत वर्मा मलिक ने काफ़ी पहले लिख लिया होगा एक कविता के रूप में, लेकिन फ़िल्म की सिचुएशन को देखते हुए शायद कल्याणजी भाई को गीत के रूप में दिया होगा...

फ़िल्म में विनोद खन्ना हिन्दी अध्यापक के रोल में भारती से प्रणय निवेदन करते हैं, इसलिये इस गीत को थोडा़ मजाहिया अन्दाज में फ़िल्माया गया है, बीच-बीच में कल्याणजी-आनन्दजी ने जो "बीट्स" दिये हैं, वे दक्षिण के "मृदंगम" का अहसास कराते हैं, लेकिन यदि हम शब्दों पर गौर करें तो पाते हैं कि यह तो एक विलक्षण कविता है.. जिसे गीत का रूप दिया गया है... कई शब्द ऐसे हैं जो अब लगभग सुनाई देना तो दूर "दिखाई" देना भी बन्द हो गये हैं, जैसे चक्षु (आँखें), कुंतल (बालों की लट), श्यामल (काला), अधर (होंठ), भ्रमर (भंवरा), याचक (माँगने वाला), व्यथित (परेशान)... तात्पर्य यह कि कोई-कोई उम्दा शब्दों वाला गीत कई बार अनदेखा रह जाता है...या फ़िल्म में उसके चित्रीकरण से उस गीत के बारे में विशेष धारणा बन जाती है, या फ़िर फ़िल्म के पिट जाने पर लगभग गुमनामी में खो जाते हैं, ऐसे कई गीत हैं...
बहरहाल पहले आप गीत (या कविता) पढिये, इसका तीसरा अन्तरा अधिकतर सुनने में नहीं आता.

प्रिये... प्रिये...

प्रिये प्राणेश्वरी.. हृदयेश्वरी, यदि आप हमें आदेश करें तो
प्रेम का हम श्रीगणेश करें... यदि आप हमें आदेश करें तो
प्रेम का हम श्रीगणेश करें...

(१) ये चक्षु तेरे चंचल-चंचल, ये चक्षु तेरे चंचल-चंचल
ये कुंतल भी श्यामल-श्यामल...
ये अधर धरे जीवन ज्वाला, ये रूप चन्द्र शीतल-शीतल
ओ कामिनी... ओ कामिनी मन में प्रवेश करें
यदि आप आदेश करें तो प्रेम का हम श्रीगणेश करें...

(२) हम भ्रमर नहीं इस यौवन के
हम याचक हैं मन उपवन के..
हम भाव पुष्प कर दें अर्पण
स्वीकार करो सपने मन के...
मन मोहिनी... मन मोहिनी, मन में प्रवेश करें...
यदि आप हमें आदेश करें ...

(३) हों संचित पुण्यों की आशा
सुन व्यथित हृदय की मृदुभाषा
सर्वस्व समर्पण कर दें हम
करो पूर्ण हमारी अभिलाषा..
गज गामिनी... गजगामिनी दूर क्लेश करें..
यदि आप हमें आदेश करें तो प्रेम का श्रीगणेश करें...

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